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व्हाट्सएप्प हिंदी शायरी – खुदगर्ज की बस्ती में

खुदगर्ज की बस्ती में एहसान भी एक गुनाह ही तो है,
जिसे तैरना सिखाओ वही डुबाने को तैयार रहता है




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Updated: April 10, 2017 — 5:10 pm

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