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शायरी २ लाइन में – उस गरीब की उम्मीदें

उस गरीब की उम्मीदें क्या होंगी… जिसकी साँसे
भी गुब्बारों में बिकती हैं..!




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Updated: April 14, 2017 — 1:53 pm

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