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शायरी २ लाइन में – चाँद में बुढ़िया

चाँद में बुढ़िया, बुज़ुर्गों में ख़ुदा को देखें
भोले अब इतने तो ये बच्चे नहीं होते हैं




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Updated: April 17, 2017 — 2:10 pm

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