शायरी २ लाइन में – मेरे अल्फाज मेरी कलम

मेरे अल्फाज मेरी कलम के मोहताज नहीं हैं
कलम तो तब चलती है जब अल्फाज चाहते हैं ।








Updated: April 20, 2017 — 1:20 pm

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