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हिंदी शायरी – अनकहे शब्दों के

अनकहे शब्दों के बोझ से थक जाती हूँ कभी,
पता नही चुप रहना समझदारी हैं या मजबूरी !!




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Updated: April 13, 2017 — 5:29 pm

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