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हिंदी शायरी – खाने को ग़म

खाने को ग़म, पीने को आँसू, बिछाने को चाहें,ढकने को आहें
शायर की झोपडी में किस चीज़ की कमी है




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Updated: April 14, 2017 — 3:52 pm

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