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हिंदी शायरी – वक़्त भी ज़ख़्मों को

वक़्त भी ज़ख़्मों को मेरे फिर मिटा पाया कहाँ,
हाथ तो मिलते रहे पर दिल मिला पाया कहाँ




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Updated: April 12, 2017 — 3:00 pm

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