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Hindi Poem 2 Lines Mein – परिंदों की फितरत से

परिंदों की फितरत से बसे थे हम एक दूसरे के दिल में,
उसके पंख थोड़े बड़े क्या हुए उसने आशियाना बदल लिया




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Updated: April 7, 2017 — 4:54 pm

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