Hindi Poem 2 Lines Mein – रोज़ रोज़ गिर कर

रोज़ रोज़ गिर कर मुकम्मल खड़ी हूँ,
ज़िन्दगी देख,मैं तुझसे कितनी बड़ी हूँ








Updated: April 17, 2017 — 5:12 pm

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