Manzil Shayari – Chirag Aandhiyon Mein Bhi Jalte Rahe

निगाहों में मंजिल थी,
गिरे और गिरकर संभलते रहे।

हवाओं ने बहुत कोशिश की,
मगर चिराग आंधियों में भी जलते रहे।





Updated: June 16, 2022 — 11:39 am
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