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New Poetry Two Lines – इक खता पर जो तोड़े

इक खता पर जो तोड़े जो तुमने इतने पाकीजा रिश्ते
बहुत जल्दी मैं थे, तुम कुछ देर क्यूँ सब्र न कर सके




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Updated: April 14, 2017 — 5:32 pm

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