New Poetry Two Lines – लफ़्ज़ अल्फ़ाज़

लफ़्ज़…अल्फ़ाज़…कागज़ और किताब…
कहाँ कहाँ नहीं रखती तेरी यादों का हिसाब…








Updated: April 20, 2017 — 4:28 pm

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