New Poetry Two Lines – है जुस्तुजू कि ख़ूब से

है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ
अब ठहरती है देखिए जा कर नज़र कहाँ








Updated: April 17, 2017 — 4:46 pm

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