शायरी २ लाइन में – सुन कर ग़ज़ल मेरी

सुन कर ग़ज़ल मेरी,
वो अंदाज़ बदल कर बोले,
कोई छीनो कलम इससे,
ये तो जान ले रहा है…….!!


शायरी २ लाइन में – उसने पूछा मुझे पाने के लिये

उसने पूछा, मुझे पाने के लिये किस हद तक जा सकते हो ?
मैंने कहा कि अगर हद ही पार करनी होती
तो तुम्हें कब का पा लिया होता।

शायरी २ लाइन में – बाज़ारों की चहल पहल से

बाज़ारों की चहल पहल से रौशन है
इन आँखों में मंदिर जैसी शाम कहाँ…


शायरी २ लाइन में – कहने देती नहीं कुछ

कहने देती नहीं कुछ मुँह से मोहब्बत मेरी;
लब पे रह जाती है आ आ के शिकायत मेरी।


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